Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2020

सामान्य.... मैं, तुम व सभी‍‍।

सामान्य  मैं, तुम व सभी‍‍ हम सब इतनी समानताओं के बावजूद भी कितने अलग हैं। अलग शक्ल, शरीर, नैन नक्ष से नहीं, बल्कि सोच से। हमे बचपन मे विद्यालयों में पूछा जाता है कि हम किसके जैसे बनना चाहते हैं। यह सवाल उस समय बड़ा आसान लगता है। परंतु जीवन जीते जीते मानों हम अपना अस्तित्व खो देते हैं। वह 'सफल व्यक्ति' की दौड़ में हम अपने उस बचपन के जवाब 'खुश व सुखी व्यक्ति' को पर्दे के पीछे छुपा देते हैं। सबका लक्ष्य पैसा, नौकरी व समाज की नज़रों में 'सही' बनना हो जाता है। आखिर इस दौड़ का इनाम है क्या? यह बात का हमें आभास ही नहीं रहता की हमें उस जवाब पर लगाए पर्दे को हटाना होगा। अपनी उस दौड़ भाग में कुछ पल रुक के खुश रहना सीखना होगा। हमें यह धीरे धीरे सीखना होगा कि सामान्य सभी हैं, पर खुश हर कोई नहीं। सामान्य रहें।  खुश रहें। थोड़ा रुक कर इस दौड़ का भी रस लें।:)                                                - मिताली